Scope of Economics / अर्थशास्त्र का क्षेत्र

अर्थशास्त्र का क्षेत्र

अर्थशास्त्र का क्षेत्र या विषय सामग्री काफी व्यापक है, जिसको निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है:


उत्पादन: उपयोगिता का सृजन उत्पादन कहलाता है। किसी भी वस्तु या सेवा के अंदर पाया जाने वाला वह गुण जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, उपयोगिता कहलाता है। अन्य शब्दों में वस्तुओं की उपयोगिता में वृद्धि करना उत्पादन कहलाता है। उत्पादन के मुख्य साधन भूमि, पूँजी, श्रम और उद्यमी होते हैं। फसलों का उत्पादन, गाड़ियों का निर्माण, कपड़ों का निर्माण आदि वस्तुओं के उत्पादन के उदाहरण हैं तथा डॉक्टर की सेवाएँ, शिक्षक की सेवाएँ, परिवहन सेवाएँ, जीवन बीमा सेवाएँ आदि सेवाओं के उत्पादन का उदाहरण है।

उपभोग: अपनी आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए वस्तुओं और सेवाओं में पाई जाने वाली उपयोगिता का प्रयोग करना उपभोग कहलाता है। अर्थशास्त्र की अधिकतर क्रियाएँ जैसे उत्पादन, विनिमय, वितरण इत्यादि उपभोग के लिए ही की जाती हैं।

विनिमय: वस्तुओं और साधनों के क्रय तथा विक्रय की प्रक्रिया विनिमय कहलाती है। आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं के उपभोग की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं का क्रय और विक्रय किया जाता है। वस्तुओं और सेवाओं का यह क्रय विक्रय सामान्य तौर पर मुद्रा के रूप में किया जाता है।

वितरण: उत्पादन की प्रक्रिया उत्पादन के साधनों के प्रयासों का परिणाम होती है। उत्पादन के साधनों को उनकी सेवाओं के बदले में आय प्राप्त होती है। अर्थशास्त्र में यह निर्धारण किया जाता है कि उत्पादन के साधनों में इस आय का बँटवारा अथवा वितरण कैसे किया जाए अर्थात लगान, ब्याज, मजदूरी और लाभ का निर्धारण कैसे किया जाए।

राजस्व: राजस्व के अंतर्गत सार्वजनिक आय, सार्वजनिक व्यय, घाटे की वित्त व्यवस्था और सरकार की प्रशुल्क नीति इत्यादि का अध्ययन किया जाता है।

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